साधना मार्ग : सर का बोझ कम करें

प्रायः लोग साधना मार्ग में आगे बढ़ते-बढ़ते एक-एक साधनाए कर करके एक-एक माला जप नित्य की साधना पूजन में बढ़ाते चले जाते हैं ,

गुरुमंत्र, शिव, गणेश, चेतना , गायत्री, नर्वाण, लक्ष्मी, कनकधारा, नवग्रह, , तारा, कमला, भुवनेश्वरी, भैरव, हनुमान और भी बहुत कुछ
5-6 स्तोत्र
3-4 चालीसे और 6-7 कवच आदि आदि उठा लिए

और 2-3 घंटे का नित्य पूजन क्रम चालू हो जाता है।

और व्यक्ति कोई भी माला छोड़ने से पूर्व इस बात से अलग भयभीत होता है कि अगर हनुमान जी की माला छोड़ दिया और हनुमान जी को बुरा लग गया तो ?????🤔

अर्थात छुपा हुआ “भय”

“भय” प्राण ऊर्जा को नष्ट करने का सबसे सरल साधन हैं।

इसलिए निर्भय हुए बिना सफलता संभव ही नहीं हैं।

भगवान और बनिये की दुकान में जब तक भेद जाना और माना नहीं जाता है ,तब तक यही अवस्था बनी रहती है।

इसलिए इन संकीर्ण मनस भयों को निकाल कर अपने गुरु के वचनों पर अत्यधिक दृढ़ता से विश्वास करके आगे बढ़ना चाहिए ।

और अपनी साधनात्मक ऊर्जा को विकेंद्रण से बचाने के लिए..कुछ ही निश्चित आवश्यक मंत्र आदि के नित्य जप करना चाहिए…भले ही माला सामर्थ्यानुसार कितना भी बढ़ा लें।

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