गुरु द्वारा प्राप्त मंत्र की तेजस्विता
आजकल मंत्र दो प्रकार से एक दूसरे को दिए जाते है। प्रथम गुरु द्वारा शिष्य को विधि विधान पूर्वक देना […]
आजकल मंत्र दो प्रकार से एक दूसरे को दिए जाते है। प्रथम गुरु द्वारा शिष्य को विधि विधान पूर्वक देना […]
जय निखिल विश्वास वो चीज है जो इष्ट तथा गुरु पर पूर्णतया होना चाहिए। और मनुष्यों पर कम ही करना
साधक साधना और तपश्चर्या तप बल तें जग सृजइ बिधाता। तप बल बिष्नु भए परित्राता॥तपबल संभु करहिं संघारा। तप तें
आज हम साधना योग और आयुर्वेद का तुलनात्मक विश्लेषण कर रहे हैं। समाज में साधना पथ जो मूलतः योग एवं
जाति का विभेद मनुष्यो से पूर्व पशुओं पक्षियों एवं वनस्पतियों में देखो, विश्लेषण से आपको प्रत्येक जाति की अपनी गुणवत्ता
साधना पथ के प्रत्येक पथिक के मन मानस में किसी न किसी साधनात्मक विशिष्टता के प्राप्ति की इच्छा होती ही
सिर्फ साधक के लिए- आपका गुरु कितना श्रेष्ठ है या नहीं इसका निर्णय समाज शिष्य की सफलता के अनुरूप ही
मंत्र अपरिमित सामर्थ्य युक्त होते हैं। इनके कार्य करने के स्तर भिन्न भिन्न होते हैं। आपने पढ़ा होगा सुना होगा
प्रायः लोग साधना मार्ग में आगे बढ़ते-बढ़ते एक-एक साधनाए कर करके एक-एक माला जप नित्य की साधना पूजन में बढ़ाते
हमारी जन्म कुंडली में कैसा भी दुर्योग हो , कुयोग हो, मारकेश हो ,काल सर्प हो या अन्य कुछ उन